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छोटे बिज़नेस vs बड़ी कंपनियाँ |GeM पर किसे क्या फ़ायदा मिलता है? (Full Comparison Guide)

छोटे बिज़नेस vs बड़ी कंपनियाँ: GeM पर किसे क्या फ़ायदा मिलता है?

Government e-Marketplace (GeM) पर छोटे व्यवसाय (MSMEs/Startups) और बड़ी कंपनियाँ (Large Enterprises) दोनों के लिए अलग-अलग नियम और लाभ तय किए गए हैं। जहाँ MSMEs को EMD में छूट, MSE Reservation और Purchase Preference मिलती है, वहीं बड़ी कंपनियाँ bulk supply capacity और उच्च मूल्य वाले टेंडर्स में बढ़त हासिल करती हैं।

यह विस्तृत तुलनात्मक मार्गदर्शिका आपको यह समझने में मदद करेगी कि आपकी फर्म साइज के अनुसार GeM पर कौन से नियम लागू होते हैं और सरकारी बिड्स जीतने के लिए सही रणनीति क्या होनी चाहिए।

GeM पर MSMEs और Startups के लिए मुख्य पात्रता और छूट (Eligibility & Exemptions)

Government e-Marketplace (GeM) पर छोटे व्यवसायों (MSMEs) और नए Startups को बड़ी फर्मों के साथ समान अवसर देने के लिए केंद्र सरकार की पब्लिक प्रोक्योरमेंट पॉलिसी (Public Procurement Policy) के तहत विशेष छूट और नियम दिए गए हैं। अगर आपके पास वैध Udyam Registration या DPIIT रिकग्निशन है, तो आप इन प्रमुख छूटों का लाभ उठा सकते हैं:

  • EMD Exemption (ईएमडी से छूट): एमएसएमई और स्टार्टअप्स को GeM पर किसी भी सरकारी टेंडर (Bids) में भाग लेते समय EMD (Earnest Money Deposit) या बिड सिक्योरिटी जमा करने से 100% छूट मिलती है। इसके लिए सेलर प्रोफाइल में Udyam Certificate लिंक्ड होना अनिवार्य है। यदि आपके पास यह दस्तावेज उपलब्ध नहीं है, तो आप एमएसएमई के लिए Udyam Certificate 2025 | उद्यम पंजीकरण का महत्त्व | छोटे व्यवसायों के लिए लाभ और अवसर पढ़कर इसकी आवेदन प्रक्रिया समझ सकते हैं।
  • Prior Turnover और Prior Experience में ढील: नए बिज़नेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती पुराना टर्नओवर और अनुभव दिखाना होता है। DPIIT से मान्यता प्राप्त Startups और Micro & Small Enterprises (MSEs) के लिए सरकारी खरीददार (Buyers) अपने टेंडर में 'Prior Turnover' और 'Prior Experience' की शर्तों से पूर्ण छूट दे सकते हैं, बशर्ते प्रोडक्ट की क्वालिटी और टेक्निकल स्पेसिफिकेशन मानक के अनुसार हों।
  • NSIC/BIS के तहत Vendor Assessment छूट: GeM पर OEM (Original Equipment Manufacturer) स्टेटस पाने के लिए सामान्यतः वेंडर असेसमेंट कराना अनिवार्य होता है। हालांकि, यदि आपकी इकाई NSIC (National Small Industries Corporation) के तहत पंजीकृत है या आपके पास वैध BIS लाइसेंस है, तो आपको GeM portal पर डायरेक्ट वेंडर असेसमेंट फीस और प्रोसेस से पूरी तरह छूट (Exemption) प्रदान की जाती है।
  • L1 Purchase Preference (25% रिजर्वेशन कोटा): पब्लिक प्रोक्योरमेंट पॉलिसी के अंतर्गत सभी केंद्रीय मंत्रालयों और पीएसयू (PSUs) के लिए अपनी कुल वार्षिक खरीद का न्यूनतम 25% भाग MSEs से खरीदना अनिवार्य है। टेंडर प्रक्रिया के दौरान यदि कोई एमएसएमई L1 बिडर के रेट से L1+15% के प्राइस ब्रैकेट में आती है, तो उसे L1 रेट मैच करके कुल ऑर्डर का कम से कम 25% हिस्सा प्राप्त करने का कानूनी अधिकार मिलता है।

इन पात्रता नियमों और छूटों की मदद से MSMEs और Startups बिना भारी बैंक गारंटी या सालों पुराने टर्नओवर के भी बड़ी कॉर्पोरेट फर्मों से GeM पर सीधे मुकाबला कर पाते हैं।

GeM पर छोटे व्यवसायों (MSMEs) के लिए प्रमुख फ़ायदे और नियम

Government e-Marketplace (GeM) पोर्टल को खास तौर पर इस तरह तैयार किया गया है कि देश के सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों (MSEs) को बड़ी फर्मों के सामने बराबरी का मौका मिल सके। केंद्र सरकार की Public Procurement Policy के तहत GeM पर छोटे व्यवसायों को कई एक्सक्लूसिव अधिकार और छूट (exemptions) दी जाती हैं, जिससे वे आसानी से सरकारी ऑर्डर हासिल कर सकें।

1. 25% MSE Purchase Preference (L1 + 15% Price Band Rule)

GeM पर टेंडर प्रक्रिया में MSEs के लिए 25% परचेज प्रेफरेंस का नियम लागू होता है। अगर कोई बड़ी कंपनी (Non-MSE) टेंडर में L1 (सबसे कम रेट देने वाली बोलीदाता) बनती है, और किसी MSE की बोली L1 + 15% price band के दायरे में आती है, तो उस MSE विक्रेता को अपनी कीमत घटाकर L1 के बराबर करने (price matching) का अवसर दिया जाता है। L1 प्राइस मैच करने पर टेंडर की कुल क्वांटिटी का कम से कम 25% ऑर्डर उस MSE को अलॉट कर दिया जाता है।

2. SC/ST और महिला उद्यमियों के लिए स्पेशल Sub-Targets

25% के इस कुल MSE कोटे को और अधिक समावेशी बनाने के लिए सरकार ने विशेष सब-टारगेट तय किए हैं:

  • SC/ST उद्यमी: 25% वाले कुल कोटा में से 4% खरीदारी अनिवार्य रूप से अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (SC/ST) के स्वामित्व वाले MSEs से की जाती है।
  • महिला उद्यमी (Women Entrepreneurs): कुल 25% कोटे में से 3% खरीदारी महिला स्वामियों वाले सूक्ष्म और लघु उद्योगों से करना तय किया गया है।

इन सभी प्राथमिकताओं का सीधा लाभ उठाने के लिए आपके पास वैध एमएसएमई के लिए Udyam Certificate 2025 | उद्यम पंजीकरण का महत्त्व | छोटे व्यवसायों के लिए लाभ और अवसर होना अनिवार्य है, जिसे GeM प्रोफाइल से लिंक किया जाता है।

3. Direct Purchase Limits और EMD एक्सैम्पशन के फ़ायदे

GeM पोर्टल पर छोटी खरीदारी को त्वरित बनाने के लिए सरकारी विभागों को Direct Purchase Limits का लाभ दिया गया है। सरकारी बायर्स ₹10,000 तक का सामान बिना किसी टेंडर प्रक्रिया के सीधे छोटे विक्रेताओं से खरीद सकते हैं। इसके साथ ही, ₹10,000 से ₹5,00,000 तक की वैल्यू के लिए L1 मोड का उपयोग करके न्यूनतम रेट देने वाले MSME विक्रेताओं को डायरेक्ट ऑर्डर मिल जाते हैं।

इसके अलावा, छोटे बिज़नेस को टेंडर में हिस्सा लेते समय EMD (Earnest Money Deposit) जमा करने से छूट मिलती है, जिससे उनकी working capital ब्लॉक नहीं होती। अधिक जानकारी के लिए आप आधिकारिक वेबसाइट gem.gov.in पर सरकारी क्रय नियमों की जांच कर सकते हैं।

बड़ी कंपनियों (Large Enterprises) को GeM पर क्या लाभ मिलते हैं?

GeM (Government e-Marketplace) पोर्टल पर भले ही MSMEs और स्टार्टअप्स को नीतिगत प्राथमिकता और EMD छूट मिलती है, लेकिन बड़ी कंपनियों (Large Enterprises) के लिए भी GeM एक विशाल और बेहद लाभदायक बाजार है। अपनी मजबूत वित्तीय स्थिति, व्यापक बुनियादी ढांचे और बड़े पैमाने पर उत्पादन क्षमता के कारण बड़ी कॉर्पोरेट फर्मों को पोर्टल पर कई विशिष्ट फायदे मिलते हैं:

1. High-Value Tenders (>₹5 Cr) में बढ़त

₹5 करोड़ या उससे अधिक के बड़े टेंडर्स में कड़े वित्तीय मानदंड (जैसे उच्च Annual Turnover, Solvency Certificate और Bank Guarantee) अनिवार्य होते हैं। छोटी कंपनियाँ कार्यशील पूंजी और वित्तीय सीमाओं के कारण इन मेगा प्रोजेक्ट्स के लिए बोली लगाने से बाहर हो जाती हैं। बड़े कॉर्पोरेट्स अपनी मजबूत Balance Sheet और वित्तीय क्षमता के दम पर इन हाई-वैल्यू सरकारी कॉन्ट्रैक्ट्स को आसानी से हासिल कर लेते हैं। टेंडर प्रक्रिया और बिडिंग स्ट्रैटेजी को विस्तार से समझने के लिए आप GeM पर टेंडर कैसे करें? | GeM टेंडर आवेदन प्रक्रिया, डॉक्यूमेंट, रजिस्ट्रेशन और जीतने के टिप्स 2026 पढ़ सकते हैं।

2. PAN-India Logistics और सप्लाय क्षमता

कई केंद्रीय मंत्रालयों और रक्षा विभागों की बोलियों में पूरे भारत में एक साथ सप्लाई (Multi-location Delivery) करने की शर्त होती है। बड़ी कंपनियों के पास अपना स्थापित Warehousing, Logistics और Supply Chain नेटवर्क होता है। इस वजह से वे दूर-दराज़ के सरकारी दफ्तरों तक भी बल्क ऑर्डर की डिलीवरी बिना किसी देरी के सुनिश्चित कर सकती हैं।

3. OEM Paneling और Reseller Control

बड़ी कंपनियाँ GeM पर OEM (Original Equipment Manufacturer) के रूप में पंजीकृत होती हैं। पोर्टल का OEM Dashboard उन्हें यह अधिकार देता है कि वे अपने ब्रांड के तहत विक्रेताओं को Authorize या De-authorize कर सकें। वे अपने प्रोडक्ट्स के लिए Reseller Network बनाकर बिना खुद डायरेक्ट बिडिंग किए भी भारी मात्रा में बिक्री और ब्रांड कंट्रोल बनाए रख सकती हैं।

4. Custom Catalog Creation का फायदा

जब किसी सरकारी विभाग को किसी विशेष स्पेक्स या कस्टमाइज्ड इक्विपमेंट की ज़रूरत होती है, तो बड़े OEMs सीधे GeM पोर्टल पर नई सर्विस या Custom Catalog की मांग कर सकते हैं। वे टेक्निकल पैरामीटर्स तय करने में मदद करते हैं, जिससे उनके कस्टमाइज्ड प्रोडक्ट्स को सीधा ऑर्डर मिलने की संभावना बढ़ जाती है और मार्केट में कॉम्पिटिशन कम हो जाता है।

ऑनबोर्डिंग और ज़रूरी दस्तावेज़ (Documents Required): MSME बनाम बड़ी फर्म

Government e-Marketplace (GeM) पर सेलर रजिस्ट्रेशन करना दोनों प्रकार की संस्थाओं के लिए फ्री है, लेकिन डॉक्यूमेंटेशन और वेरिफिकेशन के लेवल पर छोटे बिज़नेस और बड़ी कंपनियों के बीच बड़ा अंतर होता है। MSME सेक्टर्स को सरकारी नीतियों के तहत कई प्रकार की छूट मिलती है, जबकि बड़ी फर्मों को स्ट्रिक्ट कंप्लायंस और ऑडिटेड रिपोर्ट्स सबमिट करनी पड़ती हैं।

ज़रूरी दस्तावेज़ों की तुलनात्मक चेकलिस्ट (Document Checklist)

यदि आप GeM पर रजिस्ट्रेशन करने जा रहे हैं, तो अपनी कैटेगरी के अनुसार नीचे दिए गए डॉक्यूमेंट्स तैयार रखें:

  • GSTIN और Business PAN Card: यह दोनों के लिए अनिवार्य (Mandatory) है। प्रोप्राइटरशिप फर्म्स अपने व्यक्तिगत PAN का इस्तेमाल कर सकती हैं, जबकि प्राइवेट लिमिटेड या पार्टनरशिप फर्म्स के पास कंपनी PAN होना चाहिए।
  • Udyam Registration Certificate: केवल MSME और स्टार्टअप्स के लिए आवश्यक है। GeM पोर्टल पर EMD (Earnest Money Deposit) Exemption, L1 टेंडर रेस में प्राथमिकता और परचेज प्रेफरेंस का लाभ उठाने के लिए एमएसएमई के लिए Udyam Certificate 2025 | उद्यम पंजीकरण का महत्त्व | छोटे व्यवसायों के लिए लाभ और अवसर लिंक होना अनिवार्य है। बड़ी कंपनियों के लिए यह लागू नहीं होता।
  • Financial Audit Reports & CA Turnover Certificate:
    • बड़ी कंपनियाँ (Large Enterprises): पिछले 3 वित्तीय वर्षों की पूरी ऑडिटेड बैलेंस शीट, Profit & Loss स्टेटमेंट और Unique Document Identification Number (UDIN) के साथ CA सर्टिफाइड Turnover Certificate देना अनिवार्य है।
    • MSME / Small Businesses: यदि आपका बिज़नेस नया है या टर्नओवर कम है, तो कई सरकारी टेंडर्स में MSMEs को 'Past Performance' और 'Prior Turnover' क्राइटेरिया में विशेष छूट (Relaxation) मिलती है।
  • Board Resolution vs Authorization Letter: बड़ी प्राइवेट लिमिटेड या पब्लिक लिमिटेड कंपनियों को GeM अकाउंट हैंडल करने वाले ऑथराइज्ड पर्सन के लिए औपचारिक Board Resolution या Power of Attorney (PoA) अपलोड करना होता है। वहीं, MSMEs और प्रोप्राइटरशिप फर्म्स के लिए लेटरहेड पर साधारण Authorization Letter ही मान्य होता है।
  • OEM / Vendor Assessment: अगर आप मैन्युफैक्चरर (OEM) के रूप में रजिस्टर हो रहे हैं, तो बड़ी फर्मों को Quality Council of India (QCI) के ज़रिए विस्तृत Vendor Assessment से गुजरना होता है। हालांकि, gem.gov.in पर NSIC रजिस्टर्ड MSME इकाइयों को कई मामलों में इस असेसमेंट फीस और प्रक्रिया से छूट दी जाती है।

संक्षेप में, MSME विक्रेताओं का ऑनबोर्डिंग प्रोसेस काफी फ्लेक्सिबल और पेपरवर्क-लाइट है, जबकि बड़ी कंपनियों को अपनी फाइनेंशियल कैपेसिटी और कॉर्पोरेट लीगलिटी साबित करने के लिए व्यापक डॉक्यूमेंटेशन सबमिट करना पड़ता है।

GeM में बड़ी कंपनियों की चुनौतियाँ और सीमाएँ (Challenges for Large Enterprises)

GeM (Government e-Marketplace) पोर्टल पर भले ही बड़ी फर्मों के पास भारी Turnover, विशाल इंफ्रास्ट्रक्चर और बड़ी Supply Chain क्षमता होती है, लेकिन सरकार की MSME-फ्रेंडली नीतियों के कारण Non-MSME या बड़ी कंपनियों को कई प्रशासनिक और वित्तीय चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

1. EMD (Earnest Money Deposit) जमा करने की अनिवार्यता

MSMEs और DIPP-रजिस्टर्ड स्टार्टअप्स को GeM पर EMD जमा करने से पूर्ण छूट (Exemption) मिलती है। इसके विपरीत, बड़ी कंपनियों को हर छोटे-बड़े टेंडर में भाग लेने के लिए Estimated Tender Value का 2% से 5% हिस्सा EMD (Bid Security) के रूप में जमा करना पड़ता है। करोड़ों रुपये के टेंडर्स में EMD का यह फंड ब्लॉक हो जाता है, जिससे कंपनी की Working Capital पर असर पड़ता है। टेंडर की विस्तृत शर्तों को समझने के लिए आप हमारी GeM पर टेंडर कैसे करें गाइड पढ़ सकते हैं।

2. अनिवार्य Vendor Assessment प्रोसेस

बड़ी कंपनियों और Non-MSME OEMs (Original Equipment Manufacturers) के लिए GeM पर प्रोडक्ट्स लिस्ट करने से पहले अनिवार्य Vendor Assessment से गुजरना पड़ता है। यह असेसमेंट Quality Council of India (QCI) जैसी थर्ड-पार्टी एजेंसियों द्वारा किया जाता है। इसमें निम्नलिखित पड़ाव शामिल हैं:

  • Desktop Assessment: कंपनी के वित्तीय दस्तावेज, GST रिटर्न, PAN, बैलेंस शीट और स्वामित्व के प्रमाण का कड़ा सत्यापन।
  • Physical Inspection: QCI के अधिकारियों द्वारा कंपनी के मैन्युफैक्चरिंग प्लांट, क्वालिटी टेस्टिंग लैब और प्रोडक्शन कैपेसिटी का ऑन-साइट वेरिफिकेशन।

यह प्रक्रिया न केवल समय लेने वाली है, बल्कि इसके लिए कंपनियों को निर्धारित Vendor Assessment फीस भी चुकानी पड़ती है, जिससे बोर्डिंग का समय बढ़ जाता है।

3. L1 Matching में MSMEs से मिलने वाली कड़ी प्रतिस्पर्धा

Public Procurement Policy for MSEs के तहत GeM पोर्टल पर छोटे व्यवसायों को विशेष प्रोत्साहन दिया जाता है। यदि टेंडर की बिडिंग में कोई बड़ी कंपनी L1 (सबसे कम बोली लगाने वाला) बनती है, और कोई MSME बिडर L1 + 15% के प्राइस ब्रैकेट (Price Band) के भीतर आता है, तो उस MSME को L1 प्राइस पर मैच (L1 Matching) करने का अवसर दिया जाता है। प्राइस मैच करने पर टेंडर का न्यूनतम 25% ऑर्डर MSME को अलॉट कर दिया जाता है। इस नीति के कारण बड़ी कंपनियों को अपना प्रॉफिट मार्जिन बहुत कम रखना पड़ता है, फिर भी पूरे ऑर्डर वॉल्यूम की गारंटी नहीं रहती।

आधिकारिक नियमों के अनुसार, GeM portal पर सरकारी विभाग MSMEs को प्राथमिकता देने के लिए बाध्य हैं, जिससे बड़ी फर्मों को हर बोली में आक्रामक प्राइसिंग रणनीति अपनानी पड़ती है।

GeM पर प्रतिस्पर्धा (Competition) कैसे कम करें और Bids कैसे जीतें?

GeM (Government e-Marketplace) पोर्टल पर आज 60 लाख से अधिक सेल्लर्स रजिस्टर्ड हैं, जिससे डायरेक्ट परचेज और L1 टेंडर्स में भारी कम्पटीशन देखने को मिलता है। चाहे आप छोटे बिज़नेस (MSME) हों या बड़ी फर्म, सही स्ट्रेटेजी के बिना टेंडर जीतना मुश्किल हो सकता है। अगर आप प्रतिस्पर्धा को कम करके अपनी Bid Conversion Rate बढ़ाना चाहते हैं, तो इन 4 व्यावहारिक स्टेप्स को जरूर फॉलो करें:

1. Niche Product Categorization और Exact Specifications

ज़्यादातर सेल्लर्स अपने कैटलॉग को जेनेरिक कैटेगरी में अपलोड कर देते हैं, जिससे उनका प्रोडक्ट सही Buyer सर्च में नहीं आता। अपने प्रोडक्ट को उसकी सही Niche Category में लिस्ट करें और सभी Technical Specifications (जैसे Make in India %, ISO सर्टिफिकेट, मॉडल नंबर) सटीक भरें। जब बायर स्पेसिफिक फ़िल्टर लगाएगा, तो सिर्फ़ आपका प्रोडक्ट ही शॉर्टलिस्ट होगा और बेवजह का कम्पटीशन खत्म हो जाएगा।

2. OEM Authorization Code (Reseller Advantage)

यदि आप Reseller के रूप में काम कर रहे हैं, तो OEM (Original Equipment Manufacturer) से Verified OEM Authorization Code (MAF) अवश्य प्राप्त करें। GeM portal पर कई सरकारी खरीदार टेंडर में 'OEM Authorization Code Mandatory' का फ़िल्टर लगाते हैं। ऐसा होते ही अनऑथराइज़्ड कॉम्पिटिटर्स बाहर हो जाते हैं और आपकी जीत की संभावना 70-80% तक बढ़ जाती है।

3. Accurate Bid Filtering और सही टेंडर का चुनाव

हर टेंडर में भाग लेने के बजाय केवल उन्हीं बिड्स को टारगेट करें जहाँ आपकी एलिजिबिलिटी 100% मैच करती है। अपने राज्य, स्पेसिफिक डिपार्टमेंट (जैसे Defence, Railways), और टेंडर वैल्यू के हिसाब से Daily Bid Filters सेट करें। सही बिड चुनने और बिडिंग प्रोसेस को स्टेप-बाय-स्टेप समझने के लिए हमारी विस्तृत गाइड GeM पर टेंडर कैसे करें? | GeM टेंडर आवेदन प्रक्रिया, डॉक्यूमेंट, रजिस्ट्रेशन और जीतने के टिप्स 2026 पढ़ें।

4. Right Pricing Strategy (L1 और Reverse Auction)

GeM में ज्यादातर ऑर्डर L1 (Lowest Bidder) को मिलते हैं। L1 बनने के लिए अपनी लैंडिंग कॉस्ट में Freight Charges, Packaging, GST और Working Capital की लिक्विडिटी कॉस्ट जोड़कर कॉम्पिटिटिव प्राइस तय करें। Reverse Auction (RA) में हिस्सा लेते समय अपनी 'Bottom Line Margin' पहले से तय रखें ताकि भाव कम करने की होड़ में बिना प्रॉफिट के पैनिक Bidding न करनी पड़े।

पेमेंट सुरक्षा और SLAs: छोटे और बड़े Sellers के लिए पेमेंट के नियम

सरकारी ऑर्डर्स में सबसे बड़ी चिंता हमेशा से "Payment Latency" यानी भुगतान में देरी की रही है। GeM (Government e-Marketplace) ने इस समस्या को समाप्त करने के लिए सख्त Service Level Agreements (SLAs) और पारदर्शी पेमेंट मैकेनिज्म लागू किया है। छोटे MSME विक्रेताओं के लिए यह नियम सबसे बड़ा वरदान है, क्योंकि उनका Working Capital ब्लॉक होने से पूरा बिज़नेस ठप हो सकता है।

CRAC और 10 दिनों में भुगतान का नियम

GeM पर जब कोई Seller सामान या सेवाएं डिलीवर करता है, तो कंसाइनी को सामान की जांच करके पोर्टल पर CRAC (Consignee Receipt and Acceptance Certificate) जनरेट करना होता है। पेमेंट प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने के लिए GeM के नियम स्पष्ट हैं:

  • 10-Day Payment Deadline: CRAC जारी होने की तारीख के 10 दिनों के भीतर Buyer Department को विकेता के बैंक खाते में 100% पेमेंट ऑनलाइन ट्रांसफर करना अनिवार्य है।
  • Auto-CRAC जनरेशन: यदि Buyer डिलीवरी मिलने के बाद तय समयसीमा (सामान्यतः 10 दिन) में CRAC जारी नहीं करता है, तो GeM पोर्टल द्वारा ऑटोमैटिक CRAC जनरेट हो जाता है, जिससे खरीदार बिना वजह भुगतान नहीं अटका सकता।

1% प्रति दिन/माह विलंब शुल्क (Delay Penalty) का प्रावधान

पेमेंट में होने वाली देरी को रोकने के लिए GeM ने कड़े नियम बनाए हैं। यदि Buyer CRAC जारी होने के बाद तय समय में भुगतान करने में विफल रहता है, तो उस पर 1% का विलंब शुल्क (Delay Penalty / Interest) लागू होता है। यह पेनल्टी राशि देरी के दिनों के हिसाब से कैलकुलेट की जाती है और खरीदार विभाग के बजट से काटकर सीधे Seller को दी जाती है। इस क्लॉज़ के कारण सरकारी अधिकारी MSME और बड़े विक्रेताओं के बिलों को प्राथमिकता के आधार पर पास करते हैं।

छोटे बिज़नेस बनाम बड़ी कंपनियाँ: पेमेंट का प्रभाव

बड़ी कंपनियों के पास मजबूत balance sheet होती है, जिससे वे कुछ हफ्तों की देरी झेल सकती हैं। लेकिन छोटे उद्यमियों के लिए नियमित Cash Flow होना अनिवार्य है। यदि आपके पास एमएसएमई के लिए Udyam Certificate है, तो GeM का यह टाइम-बाउंड पेमेंट स्ट्रक्चर आपके वित्तीय जोखिम को पूरी तरह खत्म कर देता है। GeM की पेमेंट नीतियों और GTC (General Terms and Conditions) की विस्तृत जानकारी के लिए आप official GeM portal पर विजिट कर सकते हैं।

GeM पर MSMEs (छोटे बिज़नेस) बनाम Large Enterprises (बड़ी कंपनियाँ) - विस्तृत तुलनात्मक तालिका

GeM (Government e-Marketplace) पोर्टल पर सरकारी खरीदारी को पारदर्शी और समावेशी बनाने के लिए छोटे व्यवसायों (MSMEs) और बड़ी कंपनियों (Large Enterprises) के लिए अलग-अलग नियम बनाए गए हैं। Public Procurement Policy के तहत केंद्र सरकार MSMEs को प्रतिस्पर्धा में बनाए रखने के लिए EMD, Turnover और Prior Experience में विशेष छूट प्रदान करती है। वहीं, बड़ी कंपनियों को टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने के लिए कठोर मापदंडों को पूरा करना पड़ता है।

नीचे दी गई तालिका के माध्यम से आप समझ सकते हैं कि GeM पर छोटे बिज़नेस और बड़ी कंपनियों के लिए क्या मुख्य अंतर और छूट उपलब्ध हैं:

पैरामीटर (Parameter) MSMEs (छोटे बिज़नेस / MSEs) Large Enterprises (बड़ी कंपनियाँ)
Turnover Criteria (टर्नओवर छूट) कई टेंडर्स में Annual Turnover मापदंड से पूरी तरह छूट (Exemption) या राहत मिलती है। टेंडर डॉक्यूमेंट में मांगे गए न्यूनतम Annual Turnover मानदंड को पूरा करना अनिवार्य होता है।
EMD Fee (बयाना राशि) GFR Rule 170 के तहत EMD (Earnest Money Deposit) जमा करने से 100% छूट मिलती है। टेंडर वैल्यू का 2% से 5% तक EMD राशि अनिवार्य रूप से जमा करनी होती है।
Purchase Preference (खरीद वरीयता) MSEs के लिए 25% की खरीद वरीयता सुरक्षित है। यदि L1 बड़ी कंपनी है, तो MSE (L1+15% ब्रैकेट में) को L1 मैच करने पर ऑर्डर हिस्सा मिलता है। कोई Purchase Preference नहीं मिलती; टेंडर जीतने के लिए सबसे कम बोली (L1) लगाना आवश्यक है।
Prior Experience (पूर्व अनुभव) गुणवत्ता और तकनीकी मानकों से समझौता किए बिना Past Experience और Past Performance मानदंडों में छूट दी जाती है। पिछले 3 से 5 वर्षों का न्यूनतम अनुभव प्रमाण पत्र (Work Completion Certificates) प्रस्तुत करना अनिवार्य है।
Vendor Assessment (विक्रेता मूल्यांकन) Udyam Registered OEM (Original Equipment Manufacturer) कैटगरी में कई उत्पादों के लिए सीमित या निःशुल्क असेसमेंट का विकल्प। QCI (Quality Council of India) द्वारा पूर्ण और कठोर Vendor Assessment प्रक्रिया और फीस अनिवार्य है।

यदि आप एक सूक्ष्म या लघु उद्योग चलाते हैं और GeM के इन नियमों का पूरा लाभ उठाना चाहते हैं, तो आपके पास वैध उद्यम रजिस्ट्रेशन होना आवश्यक है। इसके फायदों की विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ें एमएसएमई के लिए Udyam Certificate 2025 | उद्यम पंजीकरण का महत्त्व | छोटे व्यवसायों के लिए लाभ और अवसर। इसके अलावा, सरकारी खरीद नीति की विस्तृत गाइडलाइंस देखने के लिए आप GeM Official Portal पर जाकर नीतियों की समीक्षा कर सकते हैं।

Public Procurement Policy: GeM Bidding में L1 Price Match करने के नियम

भारत सरकार की Public Procurement Policy (PPP) for MSEs छोटे व्यवसायों को बड़ी कंपनियों के एकाधिकार से बचाने के लिए एक शक्तिशाली सुरक्षा कवच प्रदान करती है। सामान्यतः Bidding प्रक्रिया में बड़ी कंपनियाँ (Large Enterprises) अपने बड़े प्रोडक्शन स्केल के कारण सबसे कम बोली लगाकर L1 (Lowest Bidder) बन जाती हैं। लेकिन GeM (Government e-Marketplace) पर MSME विक्रेताओं को इस प्रतिस्पर्धा में बनाए रखने के लिए L1 Price Match का विशेष नियम लागू किया गया है।

L1 + 15% Price Band और 25% ऑर्डर शेयर का गणित

यदि टेंडर में कोई नॉन-MSME या बड़ी कंपनी L1 सेलर के रूप में उभरती है, तो कानूनी तौर पर निम्नलिखित प्रक्रिया अपनाई जाती है:

  • L1 + 15% प्राइस बैंड: यदि किसी माइक्रो या स्मॉल एंटरप्राइज (MSE) द्वारा कोट की गई कीमत L1 प्राइस के 15% के दायरे (L1 + 15%) के भीतर है, तो उस MSME सेलर को अपनी कीमत घटाकर L1 की कीमत के बराबर लाने (Price Matching) का पहला अवसर दिया जाता है।
  • 25% आर्डर हिस्सा हासिल करना: जैसे ही L1+15% बैंड में आने वाला MSME सेलर L1 प्राइस को मैच करने के लिए अपनी सहमति दे देता है, बायर डिपार्टमेंट द्वारा उस MSME को कुल टेंडर क्वांटिटी का कम से कम 25% ऑर्डर हिस्सा अलॉट कर दिया जाता है। बाकी 75% हिस्सा मूल L1 सेलर को दिया जाता है।
  • मल्टीपल MSME बिडर्स की स्थिति: यदि L1+15% के दायरे में एक से अधिक MSME बिडर्स आते हैं (जैसे L2, L3 स्थान पर स्थित MSEs), तो प्राइस मैच का पहला ऑफर L2 को मिलेगा। यदि L2 मना करता है, तो L3 को अवसर मिलेगा। यदि एक से अधिक MSEs L1 प्राइस मैच करने के लिए तैयार होते हैं, तो 25% कोटा उन सभी के बीच समान या आनुपातिक (proportionately) रूप से विभाजित कर दिया जाता है।
  • विशेष सब-कोटा (Sub-reservation): इस 25% MSME शेयर के भीतर 4% कोटा SC/ST स्वामित्व वाले MSEs और 3% कोटा महिला उद्यमियों (Women MSEs) के लिए आरक्षित रखा गया है।

इस नीति का कानूनी लाभ उठाने के लिए सेलर प्रोफाइल में वैलिड Udyam Registration लिंक होना अनिवार्य है। यदि आप टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने की पूरी प्रक्रिया समझना चाहते हैं, तो GeM पर टेंडर कैसे करें संबंधी विस्तृत गाइड देख सकते हैं। इसके अलावा PPP Policy के आधिकारिक दिशानिर्देशों के लिए GeM Portal के पॉलिसी सेक्शन को भी संदर्भित किया जा सकता है।

GeM पर MSMEs बनाम Large Enterprises: मुख्य नियम, छूट और पात्रता तुलना

सुविधा / नियम (Parameters) MSME एवं स्टार्टअप्स (Micro & Small) बड़ी कंपनियाँ (Large Enterprises)
EMD (Earnest Money Deposit) छूट 100% छूट (Udyam या DPIIT सर्टिफिकेट के साथ EMD देने से पूर्ण मुक्ति) अनिवार्य (टेंडर वैल्यू का 2% से 5% तक EMD जमा करना आवश्यक)
Turnover और Prior Experience में छूट गुणवत्ता और तकनीकी मानकों को पूरा करने पर टर्नओवर और पुराने अनुभव में छूट मिलती है कोई छूट नहीं; टेंडर में मांगी गई न्यूनतम टर्नओवर और अनुभव की शर्तें पूरी करनी होंगी
Purchase Preference (खरीद वरीयता) L1 + 15% प्राइस बैंड में आने पर L1 रेट मैच करके 25% ऑर्डर का रिजर्वेशन अधिकार कोई रिजर्वेशन नहीं; ऑर्डर पाने के लिए सबसे कम बोली (L1) लगाना आवश्यक
GeM Caution Money डिपॉजिट कम लागत (वार्षिक टर्नओवर के आधार पर ₹2,000 से ₹10,000 तक) अधिक लागत (टर्नओवर के अनुसार ₹25,000 से ₹1,000,000 तक अनिवार्य)
भुगतान की समय-सीमा (Payment Timelines) CRAC (Consignee Receipt Certificate) जारी होने के 10 दिनों में भुगतान की प्राथमिकता नियम मानक संविदा शर्तों के अनुसार (सामान्यतः 30 दिनों के भीतर)
Updated: August 2026 — यह तुलना GeM (Government e-Marketplace) की नवीनतम Public Procurement Policy पर आधारित है।

Frequently Asked Questions

क्या GeM पोर्टल पर बिडिंग के लिए MSME Udyam Registration अनिवार्य है?

GeM पर अकाउंट बनाने और बिडिंग करने के लिए Udyam Registration अनिवार्य नहीं है, लेकिन यदि आप MSME Exemptions जैसे कि EMD छूट और Purchase Preference का लाभ उठाना चाहते हैं, तो Udyam Registration जरूरी है। बिना Udyam के आपको General Category का विक्रेता माना जाएगा और MSME के खास फायदे नहीं मिलेंगे।
Source: Ministry of MSME

क्या बड़ी कंपनियों (Large Enterprises) को भी GeM पर EMD जमा करना पड़ता है?

हाँ, बड़ी कंपनियों (Large Enterprises) को GeM पोर्टल पर टेंडर में भाग लेते समय EMD (Earnest Money Deposit) जमा करना अनिवार्य होता है। EMD जमा करने से छूट मुख्य रूप से Udyam Registered MSMEs और DPIIT Recognized Startups को दी जाती है, जब तक कि टेंडर की शर्तों में अलग से कोई विशेष प्रावधान न हो।
Source: Government e-Marketplace (GeM)

GeM पर L1+15% Purchase Preference का नियम क्या है और यह कैसे काम करता है?

Public Procurement Policy के तहत यदि कोई Micro or Small Enterprise (MSE) बिडर L1 प्राइस के 15% के दायरे (L1+15%) में आता है, तो उसे L1 बिडर (यदि वह Non-MSE है) के रेट को मैच करने का मौका दिया जाता है। रेट मैच करने पर MSME विक्रेता को कुल ऑर्डर का कम से कम 25% हिस्सा आवंटित किया जाता है।
Source: Ministry of Commerce and Industry

क्या नए स्टार्ट-अप्स बिना Prior Experience के GeM टेंडर में भाग ले सकते हैं?

हाँ, DPIIT द्वारा मान्यता प्राप्त Startups को GeM पोर्टल पर Prior Experience (पूर्व अनुभव) और Prior Turnover की अनिवार्य शर्तों से छूट (Exemption) मिलती है। शर्त यह है कि उनके प्रोडक्ट या सर्विस की टेक्निकल स्पेसिफिकेशन्स और क्वालिटी स्टैंडर्ड्स खरीदार की टेंडर आवश्यकताओं के बिल्कुल अनुकूल होने चाहिए।
Source: DPIIT

GeM पोर्टल पर CRAC जनरेट होने के कितने दिनों बाद पेमेंट मिलती है?

GeM नियमों के अनुसार, खरीदार (Buyer) द्वारा CRAC (Consignee Receipt and Acceptance Certificate) सफलतापूर्वक जनरेट होने के 10 दिनों के भीतर विक्रेता (Seller) को भुगतान जारी करना अनिवार्य है। समय पर भुगतान न होने पर खरीदार विभाग पर नियमानुसार पेनल्टी या देरी का ब्याज लागू हो सकता है।
Source: Government e-Marketplace (GeM)

क्या बड़ी कंपनियाँ MSME के लिए आरक्षित (Reserved) टेंडर्स में बिड लगा सकती हैं?

नहीं, जो टेंडर्स या प्रोडक्ट्स (358 विशिष्ट आइटम्स) केंद्र सरकार द्वारा विशेष रूप से MSMEs के लिए आरक्षित (Reserved) घोषित किए गए हैं, उनमें बड़ी कंपनियाँ (Large Enterprises) बिड नहीं लगा सकती हैं। इन टेंडर्स में केवल Udyam Registered सूक्ष्म एवं लघु उद्योग ही भाग लेने के लिए पात्र होते हैं।
Source: Ministry of MSME

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Last Updated: 27/06/2026 © Gem Online Portal. All Rights Reserved